अपने कॉलेज की धूप भी अच्छी लगती थी
आज यहाँ ac में भी आराम नहीं है ..
वहां कॉलेज की घास पर बैठना अच्छा लगता था
यहाँ चेयर पर भी चैन नहीं हैं ..
कैंटीन के समोसे बटवारे वाले स्वादिष्ट थे
यहाँ के बर्गर में भी स्वाद नहीं है
तेरे साथ गल्ले की चाय भी बड़ी मीठी लगती थी
यहाँ कैपाचिन्नो में भी मिठास नहीं हैं ..
वहां के जीन्स में जो मस्ती थी
यहाँ फॉर्मल में भी आराम नहीं है ..
वहां बंद कमरे में लैपटॉप से जो हँसी गूंजती थी
आज इस टेबल के पी.सी. पर हंसने लायक कोई चीज नहीं है ..
वार्डन और फेकेल्टी से लड़ते वक्त ये भी नहीं पता था की
यहाँ बॉस के सामने कुछ बोल नहीं पायेगे ??
वहां छुट्टियों का टिकट होता था ..
आज ये भी नहीं पता की घर कब जाना हैं ??
सुबह का वो मेसेज "आज नहीं जाते है यार .."
यहाँ "09:30 whre r u ?" में बदल गया है
साला जिस हस्ती को पूरा कॉलेज जानता था
वो यहाँ एक केबिन में सिमट सा गया है ..
वो एग्जाम की " एक लाइन बता दे यार ..??
साला आज वो गूगल सर्च पर भी नहीं मिलता है ..
पहले जिनसे घंटों बैठ कर बातें करते थे ..
आज मिनटों बात करने का वक़्त नहीं है ..
...
दोस्तों याद रखना ..अपनी भाइयों वाली दोस्ती ..
missing u ol..
Sunday, 10 August 2014
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