झटक कर वो अक्सर,अपने बाल बिखेर देती हैं ..
मुस्कुराती है इस कदर की, हया की रौशनी बिखेर देती है ..
बात न करू उस से तो, अक्सर मेरा ध्यान बिखेर देती है ..
जो लिखू कुछ और तो अक्सर अपने नाम की स्याही बिखेर देती है..
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